संसद की चौकीदार वाली जिम्मेदारी संभालते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू, संसदीय कार्य मंत्री ने हाल ही में एक स्पष्ट संकेत दिया कि देश के व्यवसाय को स्थगित करने की कोई गैर-गंभीर वजह नहीं बन सकती है। 2025 के अंत में आयोजित हुई सर्दियों की संसदीय बैठक के दौरान उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि "ठंडे दिमाग" से काम लेने की आवश्यकता है। हालांकि, मार्च 2026 तक की बात करें तो मानसून और बजट सत्र के दौरान फिर से खामियां उजागर हुईं। इस पूरी गलियारे में मुख्य प्रश्न यह था कि क्या विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक झमेला संसद के कार्यों को प्रभावित करेगा या फिर इसे पूरक बनाएगा।
सर्दियों का सत्र जो कि सर्दियों का संसदीय सत्र 2025नई दिल्ली में 1 दिसंबर को शुरू हुआ था और 19 दिसंबर को समाप्त हुआ था, उसे सरकार ने "बेहद सफल" बताया। लेकिन असली चुनौती अभी आने वाली थी। जब मार्च 2026 में ईरान-इजरायल संघर्ष को लेकर तलाज पैदा होना शुरू हुआ, तो लोका सभा में काम रोक गया। यह बताता है कि राजनीतिक सहयोग और निर्वाचन सुधारों जैसे मुद्दों पर चर्चा के बावजूद, संसद की नींव पर दरारें पड़ रही हैं।
विपक्षी दलों की मांगें और सभी दलीय बैठक
सितंबर के अंत में, ठीक उस समय जब सत्र की शुरुआत होने वाली थी, सभी दलीय बैठकसंसद भवन हुई थी। इसमें विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। कांग्रेस के जयराम रमेश और प्रमोद तिवाड़ी, आम आदमी पार्टी की शताब्दी रॉय, मनमुक्ति का हिस्सा बन रहे कमल हासन, तथा टीएमसी के जी.के. वासन इस बैठक में मौजूद थे। इनके अलावा सांप्रदायिक जननायक रामगोपाल यादव भी थे। प्रधानमंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री ने इस बैठक की अध्यक्षता की।
मूल बात यह थी कि विपक्ष "विशेष तीव्र संशोधन" (SIR) नामक मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए बहस चाहता था। किरण रिजिजू ने इससे पहले ही कहा था कि नियमों के अनुसार चर्चा बजट पर ही होनी चाहिए। लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकार सुझाव सुनने के लिए तैयार है। रिजिजू ने कहा, "सरकार हमेशा किसी भी सुझाव को सुनने के लिए खुश है।" लेकिन उनकी शर्त यह थी कि हंगामा नहीं होना चाहिए। अगर सदन चलने नहीं देते, तो समस्या पैदा होती है। यह समझदारी का फल था, क्योंकि पिछले बारिश के सत्र में केवल 120 घंटों में से 37 घंटे ही बहस हो पाई थी।
बजट सत्र और आने वाले चरण
जैसे ही सर्दियों का सत्र 19 दिसंबर, 2025 को खत्म हुआ, नजरें बजट सत्र 2026 पर टिक गईं। यह सत्र 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक फैला हुआ है, जिसमें दो चरण बने हैं। पहला चरण 13 फरवरी तक चला और दूसरा मार्च 9 से अप्रैल 2 तक होगा। कुल मिलाकर 30 बैठकों का अनुमान है।
राज्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षण 1 फरवरी को आया, जब संघ बजट पेश किया गया। इसके पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। यह उनका अभिभाषण था जिस पर बाद में धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस होगी। सभी दल इसमें हिस्सा लेंगे। रिजिजू का दावा था कि इस बार एसआईआर और चुनाव सुधारों पर दोनों सदनों में लगातार दो दिन तक विस्तृत चर्चा हुई। यह बात उन्हें बहुत खुशी देती थी क्योंकि उन्होंने कहा कि "दूध का दूध और पानी का पानी हो गया"।
मार्च 2026 में राजनीतिक तनाव
लेकिन कहानी यहीं पर रुकती नहीं है। मार्च 9, 2026 को एक बड़ा झटका लगा। विपक्ष के कुछ सांसदों द्वारा ईरान-इजरायल संघर्ष को लेकर लगातार विरोध करते हुए लोकसभा की प्रक्रिया को स्थगित करना पड़ा। यह स्पष्ट रूप से दिखाया कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच की राजनीतिक टक्कर अभी भी ताजगी रखे हुए है। किरण रिजिजू ने इस पर निराशा व्यक्त की।
मार्च 18, 2026 को एक अलविदा संदेश दिया गया, जो कि राज्य सभा के रिटायर्ड सदस्यों के लिए था। यूट्यूब वीडियो में, जो कि वर्तमान तिथि से तीन दिन पहले पोस्ट हुआ था, इस बात की पुष्टि मिली कि सत्र के समाप्त होते-होते काफी ऊर्जा खत्म हो गई। इससे पहले 27 जनवरी को हुई दूसरी सभी दलीय बैठक में भी राजनाथ सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया था कि हंगामा नहीं होने देंगे।
Frequently Asked Questions
संरचना सत्र में किस प्रकार का बदलाव आया?
सर्दियों के सत्र में 19 दिन चला और बजट सत्र में 30 बैठकों का अनुमान लगाया गया है। सरकार ने कहा कि इस बार विस्तृत चर्चा हुई।
विपक्ष क्यों हंगामा कर रहा है?
विपक्ष विशेष तीव्र संशोधन (SIR) और मतदाता सूची पर चर्चा चाहता था। साथ ही ईरान-इजरायल मामले में भारत की स्थिति पर बहस कर रहे थे।
संसदीय कार्य मंत्री का क्या रुख है?
किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार सुझाव सुनने को तैयार है लेकिन हंगामा नहीं होने देंगे। नियमों का पालन जरूरी है।
अगला संसदीय सत्र कब शुरू होगा?
बजट सत्र मार्च 2026 में अपनी दूसरी फेज में है और 2 अप्रैल तक चलने की उम्मीद है। यह देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
pradeep raj
मार्च 26, 2026 AT 06:08संसद के कार्यक्रम को समझना बेहद जरूरी है। कई बार लोग इसे लेकर त्वरित निर्णय लेते हैं। लेकिन नियम कठिन होते हैं। हर सांसद को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। सर्दियों का सत्र बहुत कम समय चला। इसके बाद भी काफी काम हुआ था। मगर विपक्ष को अपनी सूची बनानी थी। यह विशेष तीव्र संशोधन कहलाता है। किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया कि हंगामा नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि सुझाव सुनने के लिए खुलकर तैयार हैं। लेकिन सदन चलना चाहिए। लोकसभा में काम रोकने से नुकसान होता है। राज्य सभा में भी रिटायर्ड सदस्यों की अलविदा बड़ी थी। ऊर्जा खत्म होती जाएगी। इसलिए समझदारी बरतनी चाहिए।
Kumar Deepak
मार्च 28, 2026 AT 01:08अरे हाँ सबको समझदारी बरतनी चाहिए जबकि अंदर तो शोर ही शोर लगा रहता है। कितनी बार सुना है कि सुझाव सुनेंगे फिर भी वही गिरफ्त।
Divyanshu Kumar
मार्च 28, 2026 AT 16:34प्रजातांत्रिक प्रक्रिया में सबकी भागीदारी जरूरी है। भले ही नियम कठोर हो लेकिन अनुशासन बना रहे। वर्ण यही असल भारत है।
Govind Vishwakarma
मार्च 29, 2026 AT 23:49अनुशासन तो हर जगह नाकामी से निकलता है इस बार देखने वालो को भी गुस्सा आएगा क्योंकि सबकुछ धूल में छिप गया
Aman kumar singh
मार्च 31, 2026 AT 02:58यह बजट सत्र बहुत जरूरी था और उसमें ढेर सारे नियंत्रण दिखाई दिए। संसदीय प्रक्रिया को गंभीरता से लेना पड़ेगा। अगर हंगामा होता रहता है तो विकास रुक जाएगा। हमें सुधार की आवश्यकता है।
Ganesh Dhenu
अप्रैल 1, 2026 AT 22:22स्थिति को संभालना सरकार के पास है।
UMESH joshi
अप्रैल 2, 2026 AT 14:52आमतौर पर दोनों पक्षों को बातचीत करनी चाहिए। संघर्ष से हटाकर समाधान निकालना ही चाहिए।
Jamal Baksh
अप्रैल 2, 2026 AT 15:06उच्च स्तरीय राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार व्यवस्था का पालन अनिवार्य है। राष्ट्रपति के अभिभाषण का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।
Shankar Kathir
अप्रैल 4, 2026 AT 06:50हां यही लगता है कि सब तरफ से तैयारी हो रही थी। लेकिन वातावरण में तनाव बढ़ता रहा। हमारे पास काफी समय था। लोगों ने अपनी बात रखी। अभी भी सुधार का रास्ता खुला है। उम्मीद है कि अप्रैल तक कुछ बदलाव दिखेगा। धीरे से आगे बढ़ना चाहिए। तेजी से कोई भी निर्णय नहीं लेना चाहिए। यह सबका हिस्सा है।
Bhoopendra Dandotiya
अप्रैल 5, 2026 AT 18:34यह राजनीति का मेला अब थोड़ा शोरिया हो रहा है।
Firoz Shaikh
अप्रैल 5, 2026 AT 23:03राजनीति की गहराई को हम अक्सर गहराई में समझते हैं। लेकिन सतही चर्चा से कोई काम नहीं चलता। संसद का महत्व बहुत बढ़ा होता है। यदि नियमों का पालन नहीं होगा तो समस्याएं पैदा होती हैं। इस बार बजट पर चर्चा बहुत विस्तृत हुई। दो दिन तक लगातार बहस चली। यह एक सकारात्मक पहलू है। फिर भी कुछ गैर-जारी बने हुए थे। उन्हें समझना जरूरी था। हमें यह भी याद रखना चाहिए। विधायिका की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है। सरकार ने पूरी तरह कोशिश की थी। विपक्ष को भी सहयोग करना चाहिए था। वरना सессन खत्म नहीं हो पाता। आगे चलकर परिस्थिति बेहतर हो सकती है।
Rakesh Pandey
अप्रैल 7, 2026 AT 14:10खैर लोग देखते रहेंगे क्या होता है